Pehla pyar ❤

Part – 1

वैसे तो हर इक कहानी की अपनी इक वजह होती हैं….. पर पीहू और अंगद… ये मिले थे इक दूसरे से…. उस वक्त तो इन्हें वो मुलाकात बेवजह ही लगती थी पर उसके पीछे की वजह इन्हें पता चली… जानने के लिए पढ़ीए पूरी कहानी….

“एक लड़की भीगी -भागी सी,
सोती रातों में जागी -सी ,
मिली एक अजनबी से,
कोई आगे न पीछे…
तुम ही कहो ये कोई बात है? ”

अरे यार पीहू…. तू भी क्या 90s के गाने लगा कर बैठी है, कोई नया गाना लगा न… |
यार माया तू कुछ भी बोल लेकिन ये गाना मुझे बोरिंग नहीं लगता हैं बल्कि बेहद ही रोमेंटिक लगता हैं…. सोच बारिश में राजकपूर और नरगिस जैसा रोमांस, कितना अच्छा लगेगा ,हाँ हाँ बिल्कुल… जब कीचड़ में कपड़े गंदें होंगे तो और भी अच्छा लगेगा…. हा हा हा…
नहीं! यार तुझे ये रोमांस और प्यार की बातें समझ नहीं आएगी…. ये बोल कर पीहू बालकनी में चली जाती हैं |
पीहू एक बहुत ही समझदार लड़की हैं,अपने घर में सभी बच्चों में सबसे छोटी हैं वह… इसलिए थोड़ी- सी हठीली हैं |वह अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहती हैं …अभी बारहवीं में पढ़ती हैं …. वैसे तो पीहू पढ़ने में बहुत ही होशियार है ,पर फिर भी घर वाले उसे हर वक्त पढ़ने के लिए ही बोलते रहते हैं , और पीहू को भी अपनी किताबों से बहुत प्यार हैं, किताबों के आगे उसे न ही कोई खेल -कूद नजर आता है और न ही कोई त्यौहार या कोई मौज -मस्ती… पीहू एक बहुत ही सुलझी हुई लड़की हैं|उसका बस एक ही सपना हैं की उसे अपना एक कॉफी कैफे विद लाइब्रेरी खोलना है |
माया, पीहू की बेस्ट फ्रैंड हैं और दोनो एक ही बिल्डिंग में रहती हैं और एक ही स्कूल में भी पढ़ती हैं |

– wait for the next part ❤
– Muskaan Sharma

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ऐसा लगता है मानो कल ही की तो बात थी….

ऐसा लगता है मानो
कल ही की तो बात थी,
जब मैं पूरे घर में पायल
पहने ,इतराती, इठलाती
फिरती थी
हमेशा शैतानिया करती थी,

चाचा की लाडली
दादा – दादी की दुलारी
बुआ की राजकुमारी
सबकी प्यारी मुस्कान

मासूम – सा चेहरा, और
खुराफाती दिमाग,
सारा दिन करती थी
सबका दिमाग खराब

थोड़ी बदतमीज ,थोड़ी अकड़ू
और थोड़ी निडर,
घर की शैतानो की टोली की लीडर,

बड़ी हुई तो, बदतमीजी की क्लास स्कूल और कॉलेज
ने लगा दी,
और वो जो निडर लड़की थी,
सोसाइटी की चार लोगो वाली थ्योरी ने, रूह तक डरा दी

अब शैतानिया नहीं,
समझदारी की बातें करती हूँ,
अब पहले की तरह ,
बिना बात ही
खिलखिलाकर नहीं हँसती हूँ

अब तो कुछ और समय का
बसेरा है यहाँ,
फिर इक पंछी की तरह,
उड़ जाना है मुझे ,पर
सूरज ढलने पर , लौट आते हैं वो पंछी भी , जो दिनभर खुले
आसमान में ऊँची उड़ाने भरते है ,
पर मुझे तो इक नया बसेरा बनाना हैं….

– Muskaan Sharma

#एक अधूरी पर फिर भी पूरी कहानी मेरे जीवन की…

कुछ तो वजह होगी?

ये तेरा यूँ मेरी जिंदगी में आना
मुझे यूँ इस कदर चाहना,
कुछ तो वजह होगी?

ये तेरा बिन कहे ही सब कह जाना
मेरी हर जरूरत को समझ जाना,
मेरी एक मुस्कुराहट के लिए
तेरा कुछ भी कर जाना,
कुछ तो वजह होगी?

इस तरह से मुझे सताना
कभी रूठना तो कभी मनाना,
कुछ तो वजह होगी?

यूँ तेरा मेरी आदत बन जाना
और फिर मेरी जिंदगी में
बस एक याद बनकर रह जाना,
कभी सोचा न था ,कि इस
तरह से मुझे इश्क़ -ए-सज़ा होगी…..

बेवजह नहीं था सब कुछ
इन सब की कुछ तो वजह होगी?

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हाल -ए – दिल

तुम्हें बताना नहीं आता हैं,

और नज़रे तुम्हारी

कुछ छुपा नहीं पाती हैं ,

जब भी मुझसे मिल जाती हैं,

अनकहे दिल के तुम्हारे

हाल बयान कर जाती हैं !!

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बेइंतहा ❤

लिखने को है बहुत कुछ,

पर ,मुझे सुकून एक

तेरा ही नाम लिखने पर

मिलता है,

चाहने वाले और भी है,

पर, मुझे सिर्फ

एक तुझ पर ही ऐतबार

होता हैं,

तेरे कहने का इंतज़ार नहीं

करता है, क्योंकि तुझे तुझसे

बेहतर जानने वाले

मेरे इस दिल को पता है,

की तू सिर्फ और सिर्फ मुझसे

ही प्यार करता है,

तो फिर क़बूल करने से

क्यों डरता है,

क्यूँ करके दिखावा, इस तरह

मुझे ज़ार ज़ार करता है,

क्यूँ नहीं कह देता है, की

हाँ ,तू भी मुझसे

यूँ बेइंतहा प्यार करता है!!

– Muskaan Sharma

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काश तुम कोई नज्म होते!!

काश तुम कोई नज्म होते,और

मैं कोई किताब ,

लिख देती तुमको स्याही से,

मेरे दिल की किताब

के उन पन्नों पर,

जुदा नही कर पाता

जहाँ हमें कोई जिंदगी भर….

-Muskaan Sharma

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