Thursday thought ❤

भले ही दिन में आफ़ताब से रोशन होता हैं जग सारा , पर ,रात के अंधकार को मिटाने के लिए, न चाहते हुए भी लेना पड़ता हैं शमा का सहारा….

-मुस्कान शर्मा

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क्या याद हैं तुम्हें?

ये मौसम, ये बरसात, बारिश में उस दिन
जो की थी मुलाकात, क्या याद हैं तुम्हें?

पहली दफ़ा मिलकर एक -दूसरे से,
उठे थे दिल में जो ज्ज़बात, क्या याद हैं तुम्हें?

नींद न आने का बहाना बनाकर, मुझसे
करते थे रातभर जो बात, क्या याद हैं तुम्हें?

लबों से लबों की छुअन का, पहला – सा
था जो एहसास, क्या याद हैं तुम्हें?

तुम्हारे जिस्म की खुशबू, मेरे जिस्म में शामिल होने से पहले, जो बेपर्दा किए थे मैंने अपने सारे राज़, क्या याद हैं तुम्हें?

कभी भी नहीं छोड़ूगा तुम्हारा साथ,
करके ये वादा जो थामा था मेरा हाथ, क्या याद हैं तुम्हें?

तुम्हारा एक – एक अल्फाज़ आज भी याद हैं मुझे, क्या मेरे संग बिताई एक – भी शााम याद हैं तुम्हें?

– मुस्कान शर्मा

बरख़ा

आज़ फिर से भीगाी हैं जमीं आसमां भी नम हैं,
वो कहते थे उनके दुखों की वजह हम हैं,
यूँ ही नहीं बरसे हैं ये बादल ,
ज़रा ख़बर तो लो ,
उनकी जिंदगी में अब कौन – सा गम है ?
– मुस्कान शर्मा

मेहँदी

तेरा इश़्क मुझ पर चढ़ा
कुछ इस कदर,
की मेरी मेहंदी का रंग भी
गहरा हो गया,
तेरे संग बिताया, मेरी जिंदगी का
हर इक पल सुनहरा हो गया ,
मैं भी करती हूँ तुझसे इक वादा,
जान-ए-वफ़ा आज से
मेरा सबकुछ तेरा हो गया
– मुस्कान शर्मा

इज़हार-ए-इश्क़

आँखों से वार नहीं किया करती हूँ ,

मैं तो इश्क़ का तुमसे इज़हार किया करती हूँ,

समझा ही नहीं तुमने कभी,

नज़रें झुका के तुमसे इकरार किया करती हूँ ,

जुबां से नहीं कहती हूँ पर हाँ,

इशारों ही इशारों में,

मैं भी तुमसे प्यार किया करती हूँ….

– Muskaan sharma

ज़ार – ज़ार

उधार क्या, मैं तो खुद को ही तुझ पर निसार कर दूँ ,
तू एक बार बोला कर तो देख , मैं तेरी खुशियों के लिए खुद को ज़ार – ज़ार कर दूँ ….
– मुस्कान शर्मा

मुलाकात ❤

लफ़्ज वो एहसास कहाँ बयान कर पाते हैं , जो इशारों ही इशारों में नैना कह जाते हैं…. सिर्फ साथ दिखने से ही मुलाकात नहीं होती, कई दफ़ा… हम मिलकर भी कहाँ मिल पाते हैं….
– मुस्कान शर्मा
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