mulaquat!!

लफ़्ज वो एहसास कहाँ बयान कर पाते हैं ,
जो इशारों ही इशारों में नैना कह जाते हैं
सिर्फ साथ दिखने से ही मुलाकात नहीं होती,
कई दफ़ा, हम मिलकर भी कहाँ मिल पाते हैं
– मुस्कान शर्मा
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Pehla pyar❤ ( part – 2 )

Part -2

पीहू से तो आप लोग परिचित हो गए हैं, अब ज़रा अंगद को भी जान ले…

ये अंगद कहाँ हैं? यार ये ना हमेशा ही फँसवाता हैं…. कहाँ हैं ये? कोई तो फोन करके पूछो, कब आएगा? अरे! रिहान तू शांत रह न यार ….आ रहा होगा, रास्ते में होगा….
निखिल तू पूछ ना यार उससे फोन करके… |
शरद मेरी बात हुई हैं अभी अंगद से , वो बस पहुँचने ही वाला हैं |
यार ये अंगद न हमेशा लेट करवा देता हैं, यार रिहान तू इतना गुस्सा क्यों कर रहा हैं यार ? 5 मिनट में तेरी कौन सी ट्रेन छूट जाएगी? रात को बाहर जाने का प्लान हम सबने मिलकर बनाया था, तो जाएंगे भी साथ ही, और फिर अंगद के बिना तो कुछ मज़ा भी नहीं आएगा यार | और तुझे तो पता ही हैं की उसके पापा को उसका देर रात तक बाहर घूमना पसंद नहीं हैं | शरद ,रिहान को समझा ही रहा होता हैं की अंगद वहाँ पहुँच जाता हैं ,और फिर सब अपनी बाइक पर निकल पड़ते हैं रात को दिल्ली घूमने…|
ये हैं अंगद , सीधा – शरीफ सा लड़का, जिस पर कॉलज में आने पर थोड़ा सा असर आ ही गया हैं | वैसे तो अंगद बहुत समझदार व शांत स्वभाव का लड़का हैं, पर जब वो अपने दोस्तों के साथ होता हैं तो उसकी समझदारी जैसे उसका साथ छोड़ देती हैं, वो कितना शांत या शरीफ हैं इसके बारे में उसके दोस्तों को ही पता हैं |
( इसके बारे में आप लोग खुद ही तय करना, पूरी कहानी जानने के बाद)

Wait for the next part ❤
– Muskaan Sharma

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Thursday thought ❤

भले ही दिन में आफ़ताब से रोशन होता हैं जग सारा , पर ,रात के अंधकार को मिटाने के लिए, न चाहते हुए भी लेना पड़ता हैं शमा का सहारा….

-मुस्कान शर्मा

क्या याद हैं तुम्हें?

ये मौसम, ये बरसात, बारिश में उस दिन
जो की थी मुलाकात, क्या याद हैं तुम्हें?

पहली दफ़ा मिलकर एक -दूसरे से,
उठे थे दिल में जो ज्ज़बात, क्या याद हैं तुम्हें?

नींद न आने का बहाना बनाकर, मुझसे
करते थे रातभर जो बात, क्या याद हैं तुम्हें?

लबों से लबों की छुअन का, पहला – सा
था जो एहसास, क्या याद हैं तुम्हें?

तुम्हारे जिस्म की खुशबू, मेरे जिस्म में शामिल होने से पहले, जो बेपर्दा किए थे मैंने अपने सारे राज़, क्या याद हैं तुम्हें?

कभी भी नहीं छोड़ूगा तुम्हारा साथ,
करके ये वादा जो थामा था मेरा हाथ, क्या याद हैं तुम्हें?

तुम्हारा एक – एक अल्फाज़ आज भी याद हैं मुझे, क्या मेरे संग बिताई एक – भी शााम याद हैं तुम्हें?

– मुस्कान शर्मा

बरख़ा

आज़ फिर से भीगाी हैं जमीं आसमां भी नम हैं,
वो कहते थे उनके दुखों की वजह हम हैं,
यूँ ही नहीं बरसे हैं ये बादल ,
ज़रा ख़बर तो लो ,
उनकी जिंदगी में अब कौन – सा गम है ?
– मुस्कान शर्मा

मेहँदी

तेरा इश़्क मुझ पर चढ़ा
कुछ इस कदर,
की मेरी मेहंदी का रंग भी
गहरा हो गया,
तेरे संग बिताया, मेरी जिंदगी का
हर इक पल सुनहरा हो गया ,
मैं भी करती हूँ तुझसे इक वादा,
जान-ए-वफ़ा आज से
मेरा सबकुछ तेरा हो गया
– मुस्कान शर्मा

इज़हार-ए-इश्क़

आँखों से वार नहीं किया करती हूँ ,

मैं तो इश्क़ का तुमसे इज़हार किया करती हूँ,

समझा ही नहीं तुमने कभी,

नज़रें झुका के तुमसे इकरार किया करती हूँ ,

जुबां से नहीं कहती हूँ पर हाँ,

इशारों ही इशारों में,

मैं भी तुमसे प्यार किया करती हूँ….

– Muskaan sharma

ज़ार – ज़ार

उधार क्या, मैं तो खुद को ही तुझ पर निसार कर दूँ ,
तू एक बार बोला कर तो देख , मैं तेरी खुशियों के लिए खुद को ज़ार – ज़ार कर दूँ ….
– मुस्कान शर्मा

मुलाकात ❤

लफ़्ज वो एहसास कहाँ बयान कर पाते हैं , जो इशारों ही इशारों में नैना कह जाते हैं…. सिर्फ साथ दिखने से ही मुलाकात नहीं होती, कई दफ़ा… हम मिलकर भी कहाँ मिल पाते हैं….
– मुस्कान शर्मा
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Pehla pyar ❤

Part – 1

वैसे तो हर इक कहानी की अपनी इक वजह होती हैं….. पर पीहू और अंगद… ये मिले थे इक दूसरे से…. उस वक्त तो इन्हें वो मुलाकात बेवजह ही लगती थी पर उसके पीछे की वजह इन्हें पता चली… जानने के लिए पढ़ीए पूरी कहानी….

“एक लड़की भीगी -भागी सी,
सोती रातों में जागी -सी ,
मिली एक अजनबी से,
कोई आगे न पीछे…
तुम ही कहो ये कोई बात है? ”

अरे यार पीहू…. तू भी क्या 90s के गाने लगा कर बैठी है, कोई नया गाना लगा न… |
यार माया तू कुछ भी बोल लेकिन ये गाना मुझे बोरिंग नहीं लगता हैं बल्कि बेहद ही रोमेंटिक लगता हैं…. सोच बारिश में राजकपूर और नरगिस जैसा रोमांस, कितना अच्छा लगेगा ,हाँ हाँ बिल्कुल… जब कीचड़ में कपड़े गंदें होंगे तो और भी अच्छा लगेगा…. हा हा हा…
नहीं! यार तुझे ये रोमांस और प्यार की बातें समझ नहीं आएगी…. ये बोल कर पीहू बालकनी में चली जाती हैं |
पीहू एक बहुत ही समझदार लड़की हैं,अपने घर में सभी बच्चों में सबसे छोटी हैं वह… इसलिए थोड़ी- सी हठीली हैं |वह अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहती हैं …अभी बारहवीं में पढ़ती हैं …. वैसे तो पीहू पढ़ने में बहुत ही होशियार है ,पर फिर भी घर वाले उसे हर वक्त पढ़ने के लिए ही बोलते रहते हैं , और पीहू को भी अपनी किताबों से बहुत प्यार हैं, किताबों के आगे उसे न ही कोई खेल -कूद नजर आता है और न ही कोई त्यौहार या कोई मौज -मस्ती… पीहू एक बहुत ही सुलझी हुई लड़की हैं|उसका बस एक ही सपना हैं की उसे अपना एक कॉफी कैफे विद लाइब्रेरी खोलना है |
माया, पीहू की बेस्ट फ्रैंड हैं और दोनो एक ही बिल्डिंग में रहती हैं और एक ही स्कूल में भी पढ़ती हैं |

– wait for the next part ❤
– Muskaan Sharma